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उर्दू और हिंदी के बेहतरीन 20 शेर

March 2, 2026
उर्दू और हिंदी के बेहतरीन 20 शेर

अहसासों को शब्दों की डोर में पिरोकर, दो पंक्तियों की सधी हुई बहर में ढाल देने की कला को ही शायरी कहा जाता है। हिंदी और उर्दू ज़ुबान में अनगिनत उम्दा शेर कहे गए हैं। प्रस्तुत हैं कुछ खास और चुनिंदा अशआर।


अजब चराग़ हूँ दिन रात जलता रहता हूँ

मैं थक गया हूँ हवा से कहो बुझाए मुझे

- बशीर बद्र



दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं

कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं

- जिगर मुरादाबादी


आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है

भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है

- वसीम बरेलवी



बक रहा हूँ जुनूँ में क्या क्या कुछ

कुछ न समझे ख़ुदा करे कोई

- मिर्ज़ा ग़ालिब


हम भी क्या ज़िंदगी गुज़ार गए

दिल की बाज़ी लगा के हार गए

- दाग़ देहलवी



इस रास्ते के नाम लिखो एक शाम और

या इस में रौशनी का करो इंतिज़ाम और

- दुष्यंत कुमार


मेरे रोने की हक़ीक़त जिसमें थी

एक मुद्दत तक वो काग़ज़ नम रहा

- मीर



वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे

मैं तुझे भूल के ज़िंदा रहूं ख़ुदा न करे

- क़तील शिफ़ाई


हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते

वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते

- गुलज़ार



कुछ फैसला तो हो कि किधर जाना चाहिए

पानी को अब तो सर से गुज़र जाना चाहिए

- परवीन शाकिर

आज देखा है तुझ को देर के बाद

आज का दिन गुज़र न जाए कहीं

- नासिर काज़मी



आँखें जो उठाए तो मोहब्बत का गुमाँ हो

नज़रों को झुकाए तो शिकायत सी लगे है

- जाँ निसार अख़्तर


आप की याद आती रही रात भर

चश्म-ए-नम मुस्कुराती रही रात भर

- मख़दूम मुहिउद्दीन



और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा

राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़


दर्द ऐसा है कि जी चाहे है ज़िंदा रहिए

ज़िंदगी ऐसी कि मर जाने को जी चाहे है

- कलीम आजिज़



देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से

चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से

- साहिर लुधियानवी


चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल

हौसला किस का बढ़ाता है कोई

- शकील बदायुनी



धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो

ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो

- निदा फ़ाज़ली


अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करो

तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो

- मुनव्वर राना



और तो क्या था बेचने के लिए

अपनी आँखों के ख़्वाब बेचे हैं

- जौन एलिया