Ghazalमौलिक संग्रह

पत्ता पत्ता बूटा बूटा

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है चारागरी बीमारी-ए-दिल की रस्म-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं वरना दिलबर-ए-नादाँ भी इस दर्द का चारा जाने है