Ghazalमौलिक संग्रह

ये न थी हमारी क़िस्मत

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता अगर और जीते रहते यही इंतज़ार होता तेरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूठ जाना कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ए'तिबार होता